द्विराष्ट्र सिद्धांत व विभाजन
DOI:
https://doi.org/10.7492/rx092980Abstract
भारत का विभाजन पूरे उपमहाद्वीप के लिए 20वी सदी की सबसे बड़ी निर्णायक घटना थी। जिसकी दर्दनाक वेदना अभी भी दुखती है। उस अतीत व रक्त रंजित बंटवारे का दर्द आज भी भारत-पाक संबंधों को नहीं सुधरने दे रहा है। क्योंकि हम उन वर्षों की महान गलतियों के जवाब खोजने के प्रयासों में आज भी लगे हुए हैं। राष्ट्रीय स्मृति का जख्म देने कार्य का व्यावहारिक रूप मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना के द्वारा दिए गए द्विराष्ट्र सिद्धांत से आरंभ होता है। जिसका परिणाम भारत विभाजन के रूप में आया। मेरा इस व्याख्यान में यह जानने का प्रयास रहेगा कि द्विराष्ट्र सिद्धांत की नीति ने भारत को कैसे विभाजन किया है।
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2011-2025
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